यह उन दिनों की बात है,जब मैं 2nd क्लास में पढता था।यूं तो सारे स्कूल में लड़किया होती ही है,तो मेरे स्कूल में भी बहुत सी लड़किया जो की काफी खूबसूरत और attractive थी।सारे लोग 1 साथ ही रहते,खेलते और तो और टिफ़िन भी 1 साथ ही किया करते थे।पर पता नही क्यों मुझे उस टाइम लड़कियों के साथ रहना थोड़ा irritate फील होता था।उस स्कूल में उस टाइम 5th तक की ही क्लास हुआ करती थी ,देखते ही देखते सब बरे हो गए और सब स्कूल पास कर के दूसरे स्कूलों में एडमिशन ले लिए।स्कूल के सारे लड़कों से तो contact बना रहा पर लड़कियों से दूर हो गया। क्योंकि लड़किया गर्ल्स स्कूल में चली गयी,जिसके कारण उनलोगों से contact मानो टूट ही गया हो,उनमें से 1 लड़की मेरे घर के तरफ से ही स्कूल जाती थी,जिसे मैं बराबर देखा करता था,शायद वो मुझे भूल चुकी थी,मुझे भी उसके बारे में ज्यादा कुछ पता नही था,बस इतना पता था की,वो लड़की बचपन में मेरे साथ ही पढ़ती थी।स्कूल टाइम में भी मेरी उस से ज्यादा बात नहीँ हुआ करती थी।मैं 12th के बाद अपना गांव छोड़कर बाहर दूसरे स्टेट में पढ़ने को आ गया।
अचानक बहुत दिनों बाद मुझे वो लड़की fb पे दिखी,तो मुझे थोड़ी ख़ुशी हुई, क्योंकि वो मेरे स्कूल की ही लड़की थी। तो मैंने उसे नॉर्मली फ्रेंड request भेजा,और wait करने लगा accept होने का 1 दिन,2 दिन तीसरा भी बीत गया,और मेरे इंतज़ार की घड़ी बढ़ती चली जा रही थी।तो  मैंने उसे नार्मल msg text किया "hey, shyad tum mujhe bhul chuki ho,itni kam yadast.!!" फिर उसके तरफ से रिप्लाई आया,"अगर तुम बता दो की तुम
कौन हो? तो शायद फिर से याद आ सकते हो,फिर मैंने उसे बचपन की कुछ बाते याद दिलाई,तो वो मुझे पहचान सकी,हालाँकि वो मुझे 1st दिन ही पहचान ली थी,जब मैंने उसे frnd request सेंड की थी।
अब हमलोगों में थोड़ी थोड़ी बात as a frnd होने लगी थी,देखते ही देखते हमारी दोस्ती गहरी होती चली गयी।
बहुत दिनों के बाद हमारी दोस्ती इतनी अच्छी हो गयी की हमलोग 1 दूसरे से ढ़ेर सारी बातें शेयर किया करते थे,और एक दूसरे का मज़ाक भी बहुत उड़ाते थे। हमलोग बहुत बार एकदूसरे से मिले भी।1 दिन अचानक पता चला की उसकी शादी होने वाली है,ये सुन कर मुझे ख़ुशी हुई या दुखी मानो मुझ पर कोई प्रभाव ही न पड़ा हो,वैसे ये क्लास की पहली लड़की नही थी जिसकी शादी हो रही थी।उसकी शादी का इनविटेशन मुझे भी मिला था,शादी के दिन मैंने उसके लिए अच्छी सी 1 गिफ्ट ली,और उसकी शादी में चला गया,और जब मैं उसे गिफ्ट देने उसके करीब पंहुचा,तो मेरी आँखों से अंशुओं की बरसात होने लगी,ऐसा लगने लगा जैसे की ज़िन्दगी मेरा कोई इम्तहान ले रही हो,कोई पहाड़ टूट पड़ा हो मेरे ऊपर,उससे अच्छी तरह से नज़रे तक नही मिला पा रहा था,उस समय मुझे "प्यार" का एहसास हुआ।मैं अंदर ही अंदर पूरी तरह से देखते ही देखते टूट गया, और अपनी आँशु को छिपाने की कोसिस करता रहा,उस समय मुझे मेरी ज़िन्दगी से बस 1 ही शिकायत थी की

Aye zindagi bta tu meri kya lagti h..

Kabhi raazi to kbhi khafa lagti h..

Itna dard diya h tune mere seene mein.

Saans bhi leta hu to zakhmo ko hawa lagti h..

वो भी अंदर ही अंदर रो रही थी,बिलकुल टूट सी चुकी थी उसके चेहरे पे साफ़ दिखाई दे रही थी।अपने आंशुओ को संभाल नही पा रही थी,पर वो भी अपने आंशुओ को छिपाने में लगी हुई थी,शायद उसे भी "प्यार" हो गया था।और इसकी आंशुओ का 1-1 कतरा मुझे यूँ तोड़ता चला गया,मानो ऐसा लग रहा था,जैसे की इस दुनिया में मेरा कोई वज़ूद ही न हो।मैं दूर बैठे उसे निहार रहा था,और वो दरबाजे पर खड़ी,मुझसे नज़रे चुराते हुए अंदर ही अंदर अपने आंशुओं को पी रही थी। मेरे कुछ खास दोस्तों को बहुत पहले से ही लगता था की मैं उस लड़की से बेइम्तहान मोहब्बत करता हूं,लेकिन इस बात का मुझे भी कोई एहसास आज से पहले कभी नहीँ हुआ था। मुझे भी नही पता थी की मैं उस लड़की से कब मोहब्बत करने लगा था।मुझे यूँ बिखरा हुआ देख मेरे दोस्त लोग हमेसा मुझसे बोल रहे थे की भाई तू 1 बार बस हां कर दे लड़की को मंडप से भगा लेंगे,पर मेरा दिल ऐसा करने की इज़ाज़त नहीँ दे रहा था,शायद अभी भी दिल को कही न कही लग रहा था कि कहीं मेरे प्यार में कोई कमी तो नहीं जो मैं उसको हासिल नहीं कर पाया। देखते ही देखते सारे लोग वहाँ के महफ़िल में ढल गये,बस मैं और वो लड़की ही पूरी महफ़िल में तनहा-तनहा घुट-घुट कर जी रहे थे।फिर मैंने अपने दिल की बात उस लड़की को बताने की ठानी पर मुझमे इतनी हिम्मत नही बची थी की,मैं उससे कुछ कह सकूँ।मैंने 1 कागज के टुकड़े पर अपनी दिल के सारे अरमानों को अपने ज़ज्बातों के सहारे उतारना सुरु कर दिया। मेरे हाथ कांप रहे थे,उस पर मेरी मोहब्बत-ए-दास्तान लिखते हुए।मैं अपनी फीलिंग्स को उस कागज़ के पन्ने पर कुछ ऐसा उतार डाला की मेरे पास अल्फ़ाज़ कम पर गए,आपको शायद believe न हो,अभी भी जो ये लिख रहा हूँ,मेरे हाथ कांप रहे है। मैं उस समय अपने ज़ज्बातों पर काबू नही कर पा रहा था,और किसी तरह से वो letter पूरा कर के,मैंने उस लड़की तक पंहुचा दिया।वो मेरा लेटर लेके अकेले रूम में गयी और खोल कर पढ़ने लगी 2-3 लाइन भी अभी नही ठीक से पढ़ी थी की उसकी आँखों से आंशुओ की बौछार होने लगी,वो खुद को रोक नही पा रही थी,मैंने पहली बार किसी को यूँ टूट कर बिखरते देखा था ।और तभी उसकी 1 फ्रंड उसके पास उसे ढूंढते हुए आयी और लेटर और उसका मायूस वाला चेहरा देख साडी बात समझ गयी। तो उसने बरी मुश्किल से मेरा no.किसी तरह से मेरे दोस्तों से ली और फाइनली मुझे कॉल की,मुझे उम्मीद भी नही थी की उसका कोई कॉल भी आएगा,जैसे ही मैंने कॉल recieve की उसकी frnd बोली की ये आपसे बात करना चाहती है,उस समय मेरी ख़ुशी का ठिकाना नही रहा। वो मेरी 1 hello की आवाज सुन के रो पड़ी,और अपने प्यार का इज़हार करने लगी,3-4 min. बात हुई थी की उसको मंडप पर जाने के लिए बुलावा आया गया। लेकिन कॉल कट होने से पहले वो मुझे रोते हुए कह गयी की मैं और अब तेरे बिना नही जी सकती,ये सुनके मेरे ख़ुशी का ठिकाना न रहा,मानो मुझे दुनिया की सारी खुशियां 1 साथ मिल गयी हो।फिर मैंने जल्दी से अपने सारे दोस्तों को कॉल लगा कर तुरंत शादी में पहुँचने को बोल दिया और मैं भी पहुँच गया।
उसके बाद किसी तरह से मेरी नींद खुल गयी,और सपना अधूरा ही रह गया। मैंने फिर से दुबारा सोने की कोसिस की ताकि मेरा अधूरा सपना पूरा हो जाए, पर दुबारा नींद ही नही आयी। मैं उस दिन पूरा यही सोचता रह गया कि शादी में क्या हुआ होगा।
1.मेरे दोस्त मेरे लिए लड़की को लेके भाग गए होंगे या,
2.मैं वहाँ जा कर सबको अपने मोहब्बत-ए-दास्ताँ बता कर उसे अपने साथ ले आया.!
    यारों मेरी कहानी का क्या अजीब ending था,
    मेरी प्रेम कहानी का क्या अजीब ending था।।
     ❤️❤️मैंने propose किया जिस दिन❤️❤️
    कम्बख़त वो उनके शादी का आखरी दिन था।।
                     ***DEVRAJ***
कसम से उस दिन जैसा मज़ा ज़िन्दगी में पहले कभी नहीं आया था।।
I LUV THIS DREAM,OR SHYAD ZINDAGI BHAR YAAD RHE.!!💖💖
                         💖.....DEVRAJ.....💖

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