बारिश की वो सुहानी रात, मैं भींगता हुआ अकेला घर की तरफ जा रहा था,तभी अचानक से मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी,चांदनी रात में बारिश में भींगते हुए,उसकी खूबसूरती को देख ऐसा लग रहा था,मानो जन्नत्त से कोई परी इस धरती पर बारिश में भींगने आयी हो।जब वो मेरे सामने आयी तो उसकी नसिली आँखों ने होश उड़ा दिए।उसके माथे पर से बारिश की बूंदे,आँखों से होकर गालों को चूमते हुए,होठों से चिपक कर सीधे गले पर उतर कर मेरे होश उड़ा रही थी। ऐसा लग रहा था कि गले से टपकते हुए बारिश की बूंदे न जाने कुछ कहना चाह रही हो।उसका यूँ शर्माना और प्यार से अपने बालों को अपनी "कोमल और प्यारे" हाथों द्वारा पीछे ले जाना हाय!क्या नज़ारा था।वो कोई और नही बल्कि ये वही लड़की थी जिससे मैं  बेइम्तिहां 'mohabbat' किया करता था,और अब भी उससे उतना ही प्यार करता हूँ।इससे पहले की मैं कुछ कहता उसने मुस्कुराते हुए हल्के आवाज में पूछा कैसे हो?ये सुनकर मेरे दिल से 1एक आवाज आई
सच पूछो तो,
जब तुम्हारा नाम जुबां पर आता है
पता नहीं दिल क्यों मुस्कुराता है
तस्सली हो जाती है मन को
कोई तो है अपना,जो हर पल हस्ते हुए याद आता है।
फिर हमदोनो बात करते हुए वहां से साथ-साथ चल दिए,दूर-दूर तक सड़क पर कोई नज़र नही आ रहा था।वो थोड़ी सी सहमी हुई दिख रही थी,पर अब normal हो गयी थी।दोनों को यूँ हाथों-में-हाथें डालकर बारिश में भींगे हुए ज़माना हो गया था।कुछ दूर चलने के बाद बारिश और भी ज्यादा तेज़ हो गई और जोर-जोर से बादल गरजने लगे और बादल के गरजने की आवाज सुनकर वो सहमकर मेरी बाँहों में लिपटी गयी।उस समय मानो कुछ देर के लिए मेरी सांसे रुक गयी हो,उसके इस प्यार को देखकर मेरी आँखे भर आयी थी।और न जाने कैसे उसके गले का चैन मेरे चैन से फंस गई,उसने निकलने की बहुत कोसिस की पर उससे नही निकली क्योंकि उसका धियान चैन पर नही बल्कि कही और ही थी। ये वही चैन थी,जो मैंने उसके शादी पर उसे दी थी,जिसके अंदर उसकी तस्वीर बनी हुई थी,और उस तस्वीर में उसकी आंखें अब बस यही कह रही थी की इस life में उसे सारी खुशियां मिल गई, बस मेरी ही कमी खल रही है। ये उसे अबतक संभल कर रखी थी,जिसकी मैंने कल्पना भी नही की थी।दोनों एक-दूसरे की आँखों में देखते हुए चैन को छुड़ाने की कोसिस कर रहे थे,हमारे नाक एक दूसरे से टच कर रहे थे,उसकी सांसे फूलती जा रही थी।और लड़ते हुए नाक मानो आपस में एक दूसरे से कुछ शिकायतें  कर रहे हों। देखते ही देखते बारिश और भी जोर-जोर से होने लगी,हमदोनो 1 दूसरे के इतने करीब थे की बारिश की बूंदों को भी हमारे बीच में से पास होने के लिए izzazat लेनी पड़ रही थी,हमदोनो एक-दूसरे की आँखों में अपना वही खोया हुआ अधूरा प्यार देख रहे थे।तभी अचानक से बिजली की जोरदार आवाज आई और वो  डरकर मेरी बाँहों में आ गयी,कुछ देर तक तो यूँ ही सिमटी रही और देखते ही देखते पता  नही कब  हमारे होठों ने अपना आपा खो दिया और एकदूसरे को 'LIPS-KISS' करने लगे,उसकी आँखों में एक अजीब सा नसा सा चढ़ने लगा था।हमारी सांसे तेज़ होने लगी थी,इतनी बरसात में भी दोनों पसीना से पानी-पानी हो गए थे।मानो बरसो पुराना खोया हुआ प्यार मिल गया हो।और थोड़ी देर में हमारी चैन छूट गयी,चैन छूटने के बाद भी वो कुछ समय तक यूँ ही मेरे बाँहों से लिपटी रही।थोड़ी देर बाद फिर वो अपना सर मेरे सीने पर रख कर भींगी-भींगी रातों में धीरे-धीरे प्यारी-प्यारी बातें करते हुए दोनों घर के तरफ  चल दिए।

                              **DEVRAJ**

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