दूर होते हुए भी
               दिल के इतने पास हो तुम।
                  ये जान लो मेरी जान
             मेरे लिए कितने खास हो तुम।।

             
सोचा था अब न करूँगा किसी से मोहब्बत, ये मोहब्बत भी बड़ा तड़पाती है, न ही ठीक से सोने देती है और न ही जागने देती है। याद उसकी कुछ इस तरह आती है कि बैठे बैठे  दीवारों पर उसकी तस्वीर सी बन जाती है। एक दिन भी अगर उससे बात न हो तो बेचैनी सी छा जाती है, यूँ तो पहले किसी के लिए मैं ऐसे तड़पा न था, जैसे इसकी यादों में खो जाता हूँ, कहीं खोया न था। अब महसूस होता है कि मेरी पहले की मोहब्बत, मोहब्बत नहीं थी क्योंकी उसमें कोई तड़प और न ही कोई चाहत थी।पर अब जिससे है,कब से है इसका तो पता नहीं, पहले ऐसा लगता था कि हमारे बीच कुछ न कुछ तो है, But अब तो ऐसा लगता है जैसे की उसके बिना मेरा कोई वजूद ही न हो। रहता है इंतज़ार हर शाम उसका, की कब आ जाए कोई पैगाम उसका।

अफ़सोस है तो बस इस बात का की दूर हूँ मैं,और फिक्र इस बात का की दूर रहकर तुम भूल मत जाना मुझे।

पहले तो बस यूँ ही सुना था कि मोहब्बत में क्या से क्या हो जाता है, But अब जाकर पता चला की मोहब्बत में एक-दूसरे के लिए ज़ीना आ जाता है।मैं नहीं मानता लैला-मजनू के प्यार को ऐसा मैं सबसे कहता फिरता था, पर अब खुद मैं कब मजनू बन गया, इसका अंदाज़ा ज़माने को तो क्या मुझे भी नहीं है। हमारे बीच जब कभी बातों ही बातों में वो गुस्सा हो जाती है, और मेरे लाख मनाने के बाद भी जानबूझकर गुस्सा का दिखावा करती है, और मेरे बस एक छोटे से गुस्से पर खुद को मेरी ज़ान बताती है। कसम से दिल भर आता है उस time जब भी वो किसी को अपनी जान में मेरा नाम बताती है। हालात कुछ ऐसे हैं कि हमदोनों एक-दूसरे से दूर हैं, बातों ही बातों में पूरी रात गुज़र जाती है, पर फिर भी हमारी बातें अधूरी ही रह जाती है।।
          देवराजDEVRAJ

मेरे दोस्त पूछते है हमेशा की तू इतनी अच्छी story लाता कहाँ से है, मैंने भी कह दिया मैं तो बस उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करता हूँ story अपने आप बन जाती है।

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