सुनो अब तेरे बिना नहीं ज़ीना।

मैं बहुत दिनों से प्यार की परिभाषा ढूंढ रहा था, और मुझे पूरा का पूरा प्यार ही मिल गया। मैं किस कदर चाहता हूँ तुझे,ये मैं लफ़्ज़ों में बयां भी नहीं कर सकता। कोई किसी को इतना चाह सकता है,ये मैंने तुमसे मिलने के बाद ही एहसास किया। तेरे बगैर अब जिया नहीं जाता, एकपल की भी दूरी अब बर्दास्त नहीं कर पाता। न जाने कब तुझसे दूर भागते-भागते तेरे इतने करीब आ गया, तुझे दूसरे के लिए ज़ीना पड़े, ऐसा सोच कर भी सहम सा जाता हूँ। 

                      यहाँ ज़िंदगी जीने को तो कोई भी जी लेता है, लेकिन असली ज़िन्दगी ज़ीना तो मैंने तेरे साथ रहकर सीखी है। लोग एक-दूसरे के दिल के करीब होते है लेकिन तू हमेशा मेरे दिल में रहती है....बस एक ही बात का अफ़सोस है कि हमदोनों एक-दूसरे से बहुत दूर हैं, लेकिन मैं तुझे हमेशा अपने साथ फ़ील करता हूँ। मैं प्यार से भागते-भागते न जाने कब तेरे प्यार में इतना गहरा डूब गया,इसका मुझे कुछ एहसास तक नहीं। तू मेरा बस प्यार ही नहीं मेरी सबकुछ है....

            You Are My Everything..
                      I Love You...
             I Can't Live Without You.

             

                       **DEVRAJ**

      प्यार वो नहीं जिसमें ढ़ेर सारी बात हो
    प्यार वो भी नहीं जिसमे हररोज़ मुलाकात हो
                      प्यार तो वो है
                  जिसमे दूर होते हुए भी
            हमेशा पास होने का एहसास हो


कोई किसी के प्यार में इतना डूब सकता है, ये मुझसे बेहतर और कोई नहीं बता सकता, दिन-रात बस तेरी ही बात और तो और सपनों में भी बस तू ही तू ,एक नशे सी चढ़ गई है अब तो तू, एक ऐसा नशा जिसे ज़िन्दगी छोड़ना न चाहती, एक ऐसा नशा जिसकी मुझे हरदम जरूरत है, एक ऐसा नशा जिसे ज़िन्दगी ने अपनी ज़िंदगी मान ली है। 

                अक्सर  चाँद को देख कर लोगों को किसी-न-किसी की याद आती है, उसे देखकर किसी की यादों में खुद को डुबना पसंद करता है, लेकिन मैं जब तुझे देखता हूँ तो मुझे चाँद की याद आती है। जिस तरह चाँद आसमाँ के बिना अधूरा-अधूरा रहता है, मेरी भी कुछ उसी तरह हालात हैं।जिस तरह हर कोई अपनी माँ के हाथों की उंगली के सहारे अपनी  सारी बचपना गुज़ार देते हैं, मैं तुम्हारे सहारे अपनी पूरी ज़िंदगी गुजारना चाहता हूँ। पता नहीं कुछ दिनों से क़िस्मत बहुत साथ दे रही है मैं तुझे याद करता हूँ और तेरी call आ जाती है, इसे इत्तफ़ाक़ समझूँ या अपनी क़िस्मत.??  अब तू ही बता क्यों न मैं चाहूँ तुझे यूँ टूटकर.?

                 अब तो बस तेरी ही यादों में टूटकर बिखरने को जी करता है। तुम्हारी वो नाराज़गी, वो छोटी-छोटी सी बातों पर बड़े प्यार से लड़ना-झगड़ना, तेरे साथ मे बिताए हुए खुशियों के वो दो पल..... ये सब याद करके बहुत मज़ा आता है।

                    ...I LOVE YOU...

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